रसों की परिभाषा, स्थायी भाव और आसान उदाहरण
रस हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण विषय है। परीक्षा में रस की परिभाषा, स्थायी भाव, उदाहरण और पहचान से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
रस की परिभाषा
काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से हृदय में उत्पन्न होने वाले आनंदमय भाव को रस कहते हैं।
सरल भाषा में—
कविता या साहित्य को पढ़कर हमारे मन में जो विशेष भाव उत्पन्न होता है, वही रस कहलाता है।
उदाहरण के लिए, किसी कविता को पढ़कर यदि मन में प्रेम का भाव उत्पन्न होता है तो वहाँ श्रृंगार रस होगा और यदि वीरता का भाव उत्पन्न होता है तो वहाँ वीर रस होगा।
1. श्रृंगार रस
परिभाषा
जहाँ काव्य में प्रेम, सौंदर्य, मिलन या विरह का वर्णन होता है, वहाँ श्रृंगार रस होता है।
स्थायी भाव = रति
उदाहरण
“मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ।
जा तन की झाईं परै, स्याम हरित-दुति होइ॥”
इस दोहे में राधा-कृष्ण के प्रेम और सौंदर्य का भाव दिखाई देता है, इसलिए यहाँ श्रृंगार रस है।
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प्रेम = श्रृंगार रस
श्रृंगार रस के दो प्रमुख रूप हैं—
संयोग श्रृंगार — प्रिय से मिलने का भाव।
वियोग श्रृंगार — प्रिय से बिछड़ने का भाव।
2. हास्य रस
परिभाषा
जहाँ किसी व्यक्ति, वस्तु, बात या परिस्थिति के कारण हँसी उत्पन्न होती है, वहाँ हास्य रस होता है।
स्थायी भाव = हास
उदाहरण
“बंदर ने टोपी पहन ली,
आईने में शक्ल निहार।
खुद को समझे बड़ा नवाब,
देखकर हँसे सब यार॥”
इस उदाहरण में मजेदार परिस्थिति के कारण हँसी का भाव उत्पन्न हो रहा है, इसलिए हास्य रस है।
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हँसी = हास्य रस
3. करुण रस
परिभाषा
जहाँ काव्य में दुःख, शोक, पीड़ा या वियोग का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ करुण रस होता है।
स्थायी भाव = शोक
उदाहरण
“माँ की याद सताए मन को,
आँखों से आँसू आए।
सूना-सूना घर लगता है,
कोई समझ न पाए॥”
इस उदाहरण में दुःख और शोक का भाव है, इसलिए करुण रस है।
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दुःख = करुण रस
4. वीर रस
परिभाषा
जहाँ काव्य में वीरता, साहस, पराक्रम और उत्साह का वर्णन होता है, वहाँ वीर रस होता है।
स्थायी भाव = उत्साह
उदाहरण
“इंद्र जिमि जंभ पर, बाड़व सुअंभ पर,
रावन सदंभ पर रघुकुल राज हैं।”
इन पंक्तियों में वीरता, शक्ति और पराक्रम का भाव दिखाई देता है, इसलिए यहाँ वीर रस है।
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साहस = वीर रस
5. रौद्र रस
परिभाषा
जहाँ काव्य में क्रोध, गुस्सा या उग्रता का भाव दिखाई देता है, वहाँ रौद्र रस होता है।
स्थायी भाव = क्रोध
उदाहरण
“अन्याय देख वीर गरजा,
आँखों में अंगार।
अत्याचार मिटाने निकला,
लेकर हाथ तलवार॥”
इस उदाहरण में तीव्र क्रोध और उग्रता का भाव दिखाई देता है, इसलिए रौद्र रस है।
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क्रोध = रौद्र रस
6. भयानक रस
परिभाषा
जहाँ काव्य में भय, डर या आतंक का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ भयानक रस होता है।
स्थायी भाव = भय
उदाहरण
“घोर अँधेरी रात थी,
जंगल था सुनसान।
दूर कहीं आवाज आई,
काँप उठा इंसान॥”
इस उदाहरण में भय और डर का भाव उत्पन्न हो रहा है, इसलिए भयानक रस है।
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डर = भयानक रस
7. वीभत्स रस
परिभाषा
जहाँ काव्य में घृणा या अरुचि उत्पन्न करने वाली वस्तु या परिस्थिति का वर्णन होता है, वहाँ वीभत्स रस होता है।
स्थायी भाव = जुगुप्सा (घृणा)
उदाहरण
“कूड़े के ढेर पर सड़ती चीजें,
चारों ओर दुर्गंध।
देखकर मुँह फेर लिया सबने,
मन में उपजी घृणा प्रचंड॥”
यहाँ घृणा का भाव उत्पन्न हो रहा है, इसलिए वीभत्स रस है।
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घृणा = वीभत्स रस
8. अद्भुत रस
परिभाषा
जहाँ किसी आश्चर्यजनक, अनोखी या अद्भुत घटना को देखकर विस्मय का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ अद्भुत रस होता है।
स्थायी भाव = विस्मय
उदाहरण
“अखिल भुवन चर-अचर सब,
हरिमुख में लखि मात।”
इस प्रसंग में यशोदा ने कृष्ण के मुख में पूरा संसार देखा और आश्चर्यचकित हो गईं। इसलिए यहाँ अद्भुत रस है।
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आश्चर्य = अद्भुत रस
9. शांत रस
परिभाषा
जहाँ काव्य में वैराग्य, संसार की नश्वरता, शांति और संतोष का भाव दिखाई देता है, वहाँ शांत रस होता है।
स्थायी भाव = निर्वेद
उदाहरण
“माया मरी न मन मरा, मर-मर गया शरीर।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर॥”
इन पंक्तियों में संसार की नश्वरता और वैराग्य का भाव दिखाई देता है, इसलिए यहाँ शांत रस है।
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वैराग्य = शांत रस
10. वात्सल्य रस
परिभाषा
जहाँ माता-पिता या बड़ों के मन में बच्चों के प्रति प्रेम, स्नेह और ममता का भाव दिखाई देता है, वहाँ वात्सल्य रस होता है।
स्थायी भाव = वत्सलता / स्नेह
उदाहरण
“मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।
मोसों कहत मोल को लीनो, तू जसुमति कब जायो॥”
बाल कृष्ण अपनी माँ यशोदा से भोली शिकायत कर रहे हैं। इस प्रसंग में माँ और बच्चे के बीच का स्नेह और ममता दिखाई देती है, इसलिए वात्सल्य रस है।
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ममता = वात्सल्य रस
रस एक नजर में
| क्रम | रस | स्थायी भाव | आसानी से याद करें |
|---|---|---|---|
| 1 | श्रृंगार | रति | प्रेम |
| 2 | हास्य | हास | हँसी |
| 3 | करुण | शोक | दुःख |
| 4 | वीर | उत्साह | साहस |
| 5 | रौद्र | क्रोध | गुस्सा |
| 6 | भयानक | भय | डर |
| 7 | वीभत्स | जुगुप्सा | घृणा |
| 8 | अद्भुत | विस्मय | आश्चर्य |
| 9 | शांत | निर्वेद | वैराग्य |
| 10 | वात्सल्य | वत्सलता | ममता |
रस याद करने की सबसे आसान Trick
एक लाइन में:
प्रेम से श्रृंगार, हँसी से हास्य, दुःख से करुण, साहस से वीर, क्रोध से रौद्र, डर से भयानक, घृणा से वीभत्स, आश्चर्य से अद्भुत, वैराग्य से शांत और ममता से वात्सल्य।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बातें
रस से प्रश्न आने पर विद्यार्थियों को मुख्य रूप से ये बातें याद रखनी चाहिए:
रस की परिभाषा
रस का नाम
स्थायी भाव
उदाहरण
उदाहरण में दिखाई देने वाला मुख्य भाव
सबसे आसान तरीका: पहले स्थायी भाव याद करें और फिर उससे रस को जोड़ें।
जैसे—
रति → श्रृंगार
हास → हास्य
शोक → करुण
उत्साह → वीर
क्रोध → रौद्र
भय → भयानक
जुगुप्सा → वीभत्स
विस्मय → अद्भुत
निर्वेद → शांत
वत्सलता → वात्सल्य
Disclaimer
इस ब्लॉग पर दी गई जानकारी ‘रस’ विषय की पढ़ाई और revision में सहायता के लिए है। इसे आसान भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
यह ब्लॉग किसी भी बोर्ड या सरकारी संस्था से आधिकारिक रूप से संबद्ध नहीं है।
